ज्यादा सोचना पड़ सकता है भारी: ओवरथिंकिंग के नुकसान

आज के डिजिटल और प्रतिस्पर्धी युग में मानसिक अशांति एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अक्सर हम खुद को ऐसे विचारों के जाल में फंसा हुआ पाते हैं जिनका कोई अंत नहीं होता, और यही स्थिति धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य को खोखला करने लगती है।

Overthinking एक आम समस्या बनती जा रही है

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि हर व्यक्ति मानसिक दबाव में है। इसी दबाव के कारण ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना एक सामान्य आदत बन गई है जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।

अक्सर हम उन बातों पर विचार करते रहते हैं जो बीत चुकी हैं या भविष्य की उन घटनाओं से डरते हैं जो शायद कभी होंगी ही नहीं। यह स्थिति धीरे-धीरे हमारी एकाग्रता को खत्म करने लगती है और वर्तमान के आनंद को पूरी तरह छीन लेती है।

Overthinking का दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

जब हम लगातार किसी एक ही विचार के बारे में सोचते रहते हैं, तो हमारा मस्तिष्क कभी शांत नहीं हो पाता। इससे दिमाग में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो लंबी अवधि में ब्रेन सेल्स को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

ओवरथिंकिंग के कारण निर्णय लेने की क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित होती है। दिमाग इतना थक जाता है कि साधारण समस्याओं का समाधान खोजना भी मुश्किल लगने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘एनालिसिस पैरालिसिस’ कहा जाता है।

इसके अलावा, यह स्थिति आपकी नींद के चक्र को भी पूरी तरह बिगाड़ देती है। रात भर चलते विचारों के कारण दिमाग को वह गहरा आराम नहीं मिल पाता जिसकी उसे शारीरिक और मानसिक मरम्मत के लिए सख्त जरूरत होती है।

शरीर पर भी पड़ता है Overthinking का असर

मानसिक तनाव का सीधा संबंध हमारे शारीरिक स्वास्थ्य से होता है और ओवरथिंकिंग इसे सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। लंबे समय तक तनाव में रहने से पाचन तंत्र खराब हो सकता है और हृदय रोग का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।

जब मस्तिष्क तनाव में होता है, तो वह पूरे शरीर को ‘फाइट या फ्लाइट’ मोड में डाल देता है। इसके परिणामस्वरूप मांसपेशियों में बेवजह खिंचाव, अचानक सिरदर्द और पूरे दिन लगातार थकान महसूस होने लगती है जो किसी भी काम में मन नहीं लगने देती।

Overthinking कैसे करें कंट्रोल?

ओवरथिंकिंग को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है कि आप ‘माइंडफुलनेस’ का अभ्यास करें। इसका मतलब है कि आप वर्तमान पल में जीना सीखें और उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करें जो अभी आपके नियंत्रण में हैं, न कि बीते हुए कल पर।

जब भी आपको लगे कि आप किसी बात को लेकर बहुत ज्यादा सोच रहे हैं, तो तुरंत खुद को किसी शारीरिक गतिविधि में व्यस्त कर लें। व्यायाम, पेंटिंग या अपनी पसंद का संगीत सुनना आपके दिमाग को नकारात्मक चक्र से बाहर निकालने में मदद करता है।

अपनी चिंताओं को एक डायरी में लिखना भी एक शानदार विकल्प हो सकता है। जब विचार कागज पर उतर आते हैं, तो मन का बोझ हल्का होता है और आप उन समस्याओं को तार्किक ढंग से देख पाते हैं, जिससे डर कम हो जाता है।

यदि ओवरथिंकिंग आपकी दैनिक दिनचर्या और कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है, तो किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लेना बहुत जरूरी है। वे आपको थेरेपी के जरिए इन अनचाहे विचारों को प्रबंधित करने के सही तरीके सिखा सकते हैं।

याद रखें कि मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना कोई विलासिता नहीं बल्कि जरूरत है। समय रहते सही कदम उठाना और अपनी जीवनशैली में बदलाव करना ही आपको एक खुशहाल, शांत और स्वस्थ भविष्य की ओर ले जा सकता है।

Written by Anju Rawat |Published : February 18, 2026 4:08 PM IST

Overthinking Affects Brain Health: आज की तेज रफ्तार भरी जिंदगी में Overthinking एक बेहद आम समस्या बनती जा रही है। इसमें व्यक्ति जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है, जो लोगों में मानसिक समस्या बनती जा रही है। इसमें छोटी-छोटी बातों पर बार-बार सोचते रहना, बीते हुए पलों को याद करना या आने वाले समय को लेकर लगातार चिंता में बने रहना ही Overthinking के संकेत हैं। कई लोग ओवरथिंकिंग को सामान्य मान लेते हैं, लेकिन आपको बता दें कि यह आपके दिमाग को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। Overthinking तब शुरू होती है, जब दिमाग किसी एक विचार पर अटक जाता है और उससे बाहर नहीं पानी मुश्किल सा लगता है। यह स्थिति मानसिक थकान का कारण बन सकती है। आइए, आकाश हेल्थकेयर की एसोसिएट कंसल्टेंट-साइकेट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर (Dr. Pavitra Shankar, Associate Consultant- Psychiatry, Aakash healthcare) से जानते हैं ओवरथिंकिंग करने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

Overthinking का प्रभाव सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता है, यह शरीर को भी प्रभावित करता है। लंबे समय तक ओवरथिंकिंग करने और तनाव में रहने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं। जैसे-
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Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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Written by Anju Rawat |Published : February 18, 2026 4:08 PM IST

Overthinking Affects Brain Health: आज की तेज रफ्तार भरी जिंदगी में Overthinking एक बेहद आम समस्या बनती जा रही है। इसमें व्यक्ति जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है, जो लोगों में मानसिक समस्या बनती जा रही है। इसमें छोटी-छोटी बातों पर बार-बार सोचते रहना, बीते हुए पलों को याद करना या आने वाले समय को लेकर लगातार चिंता में बने रहना ही Overthinking के संकेत हैं। कई लोग ओवरथिंकिंग को सामान्य मान लेते हैं, लेकिन आपको बता दें कि यह आपके दिमाग को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। Overthinking तब शुरू होती है, जब दिमाग किसी एक विचार पर अटक जाता है और उससे बाहर नहीं पानी मुश्किल सा लगता है। यह स्थिति मानसिक थकान का कारण बन सकती है। आइए, आकाश हेल्थकेयर की एसोसिएट कंसल्टेंट-साइकेट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर (Dr. Pavitra Shankar, Associate Consultant- Psychiatry, Aakash healthcare) से जानते हैं ओवरथिंकिंग करने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

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FAQ

क्या ओवरथिंकिंग एक मानसिक बीमारी है? ओवरथिंकिंग स्वयं में कोई नैदानिक बीमारी नहीं है, लेकिन यह एंग्जायटी (Anxiety) और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं का एक प्रमुख लक्षण या कारण हो सकती है।

ज्यादा सोचने से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? ज्यादा सोचने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) बढ़ जाता है, जिससे पाचन तंत्र में गड़बड़ी, हृदय रोग का खतरा, सिरदर्द और लगातार थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ओवरथिंकिंग को तुरंत कैसे नियंत्रित करें? इसे नियंत्रित करने के लिए गहरी सांस लें (Deep Breathing), खुद को किसी शारीरिक कार्य में व्यस्त करें, या अपने विचारों को एक डायरी में लिखें। माइंडफुलनेस का अभ्यास इसमें बहुत कारगर है।

एनालिसिस पैरालिसिस (Analysis Paralysis) क्या है? जब कोई व्यक्ति किसी विषय पर इतना अधिक सोचने लगता है कि वह कोई भी निर्णय लेने में असमर्थ हो जाता है, तो इस स्थिति को एनालिसिस पैरालिसिस कहा जाता है।

मानसिक शांति ही उत्तम स्वास्थ्य की नींव है। यदि आप भी ओवरथिंकिंग के शिकार हैं, तो आज ही से मेडिटेशन शुरू करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लें ताकि आप एक संतुलित जीवन जी सकें।

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